ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाली पर उठे सवाल गलत फैसलों का असर 2027 के चुनावी समीकरण पर पड़ने की आशंका

 


पूर्वांचल की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर 


ओबरा, सोनभद्र ।
आदिवासी और वनवासी बहुल क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों के लिए कम फीस में शिक्षा का बड़ा केंद्र रहे ओबरा इंटर कॉलेज की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पूर्व छात्रों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है और छात्र संख्या में भारी गिरावट आई है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 में परिसर के भीतर डीएवी पब्लिक स्कूल की स्थापना के बाद से ही ओबरा इंटर कॉलेज का अस्तित्व संकट में पड़ गया। वर्ष 2022 में कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया बंद किए जाने पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था, जिसके बाद कुछ समय के लिए प्रवेश दोबारा शुरू हुआ।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय को बेहतर बनाने के दावे किए गए थे, लेकिन वर्तमान में स्थिति चिंताजनक है। कभी 1500 से अधिक छात्र संख्या वाले इस विद्यालय में अब विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रह गई है। शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई न होना, साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था खराब होना जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं।

विद्यालय प्रबंधन पर यह भी आरोप है कि कई छात्रों की उपस्थिति बेहद कम होने के बावजूद परीक्षा दिलाई जा रही है। वहीं कुछ अभिभावकों ने फीस वसूली और टीसी देने में अनियमितता की शिकायत भी उठाई है।

पूर्व छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विद्यालय को बचाने के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन, IGRS पोर्टल पर शिकायत, मुख्यमंत्री जनता दरबार और विधान परिषद तक मामला उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा, जिसका असर आने वाले 2027 के चुनावी माहौल पर भी देखने को मिल सकता है।





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