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स्वराज के नाम पर जनता अब भी अधिकारों से वंचित — युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर

 पूर्वांचल की आवाज न्यूज़ संपादक विजय शंकर पाण्डेय 

अंग्रेजों से मिली आज़ादी, लेकिन असली स्वराज आज भी अधूरा”


कागज़ी प्रक्रियाओं में उलझी जनता, बेरोजगारी-भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज़

देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ादी मिले दशकों बीत चुके हैं, लेकिन “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का सपना आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है। यह कहना है युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर का, जिन्होंने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आजादी केवल राजनीति करने और बोलने तक सीमित होकर रह गई है, जबकि असली स्वराज का अर्थ है — जन्म से ही नागरिकों को उनके सभी मूल अधिकार सहज रूप से प्राप्त हों।

उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम जनता को जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास, पेंशन, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जटिल प्रक्रियाओं में उलझाकर रखा गया है। गरीब, मजदूर और बेरोजगार युवा सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि भ्रष्टाचार व्यवस्था की जड़ों में समा चुका है।

संतोष ठाकुर ने कहा कि स्वराज का वास्तविक अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है जहां हर नागरिक को सम्मान, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय बिना भेदभाव के मिले। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे विचार क्रांति के माध्यम से भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक देश का अंतिम व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए भटकता रहेगा, तब तक “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा अधूरा ही माना जाएगा।




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