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क्रांति का मतलब बम-पिस्तौल नहीं, जनसमस्याओं के समाधान का संघर्ष है”*

 

 *युवा क्रांतिकारी नेता संतोष ठाकुर का जातिवादी राजनीति और संसाधनों की लूट पर बड़ा हमला* 

पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय/

सत्यनारायण मौर्य ब्यूरो चीफ 

भारत में बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी और जल-जंगल-जमीन के संकट को लेकर युवा क्रांतिकारी नेता संतोष ठाकुर ने तीखा बयान देते हुए कहा कि “क्रांति का मतलब बम और पिस्तौल नहीं होता, बल्कि वर्तमान जनसमस्याओं के खिलाफ सीधे बदलाव की लड़ाई ही असली क्रांति है।”




उन्होंने कहा कि क्षेत्रफल के हिसाब से भारत के पास विश्व की केवल 2 प्रतिशत जमीन है और पीने योग्य जल भी मात्र 4 प्रतिशत है, जबकि जनसंख्या दुनिया में सबसे बड़ी आबादी में शामिल है। ऐसे में देश को जातिवाद और विभाजन की राजनीति में उलझाना भारतीय परिवारों को अंधेरे की ओर धकेलने की साजिश है।


 *“गरीब, बेरोजगार और जल-जंगल-जमीन के लिए संघर्ष करने वाले युवा आगे आएं”* 


 *संतोष ठाकुर ने युवाओं से सामाजिक बदलाव और विचार क्रांति का किया आह्वान* 


युवा नेता संतोष ठाकुर ने देश के गरीब, गुरबा, मजदूर और बेरोजगार युवाओं से एकजुट होकर संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब समय “विचार क्रांति” का है, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को ताकत मिले और जल, जंगल, जमीन तथा रोजगार के अधिकार के लिए व्यापक आंदोलन खड़ा हो।


उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जातिवादी नेता जनता के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। ऐसे दौर में युवाओं को जागरूक होकर सामाजिक न्याय, समानता और विकास की लड़ाई में आगे आना होगा।

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