पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
सत्यनारायण मौर्य ब्यूरो चीफ सोनभद्र
*नगवां ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों में आवास के आस में है अपात्र*
बैनी सोनभद्र। विकास खंड नगवां में प्रधानमंत्री आवास के सूची के सत्यापन का कार्य समाप्त हो गया है लेकिन जानकारों का कहना है कि अब भी नगवां ब्लॉक के हर ग्राम पंचायतों में अपात्र भी सूची में नाम दर्ज करवाकर आवास योजना का लाभ लेने की आस लगाए बैठे हैं अगर ईमानदारी से हर ग्राम पंचायतों के प्रधानमंत्री आवास सूची का सत्यापन आवास पात्रता के हिसाब से हो तो हर गांव में बड़ी संख्या में अपात्रों के मिलने की पूरी संभावना है।
गौरतलब हो कि डीएम चर्चित गोंड के निर्देशानुसार जिले में प्रधानमंत्री आवास सूची के सत्यापन का कार्य 21 जून से 25 जून तक करने का निर्देश दिया गया था जिसमे कहा गया था कि हर ग्राम पंचायत में खुली बैठक बुलाकर ग्रामीणों के सामने प्रधानमंत्री आवास सूची को पढ़ा जाय और जिनके नाम पर आपत्ति जताई जाय उसको पात्रता सूची से हटाया जाए क्या डीएम के इस आदेश की अधिकारी पूरी निष्ठा पारदर्शिता के साथ पालन किए है ये एक प्रश्न खड़ा हो रहा है।
सूत्रों की माने तो नगवां ब्लॉक के हर ग्राम पंचायतों में 20 प्रतिशत या उससे भी अधिक अपात्रों के नाम दर्ज हैं ये वो अपात्र लोग है जिनका घर पक्के का है या आवास पात्रता के मानदंड को पूरा नहीं करते है अगर इसकी उच्चस्तरीय जांच पड़ताल कराई जाय तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
आप को बता दें कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने हर गरीब को पक्के का आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास उपलब्ध कराती है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही उदासीनता से पात्र आवास से वंचित हो जाते है और अपात्रों को आवास योजना का लाभ दे दिया जाता है जिससे आज भी अधिकतर गरीब कच्चे के मकान या झोपड़ी में अपना गुजर बसर करने को मजबूर है नियमों को ताक पर रख कर ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने चहेतों को आवास देने में सफल हो जाते हैं और यही से प्रधानमंत्री आवास योजना दम तोड़ती नजर आती हैं आज भी हर ग्राम पंचायतों में ग़रीब लोग आवास की आस में ब्लॉक से लेकर ग्राम प्रधान सचिव के आगे पीछे परिक्रमा करते हुए नजर आते है। प्रधानमंत्री आवास में ऐसे भी लोगों का नाम जुड़ गया है जिनकी शादी नहीं हुई है जबकि ऐसे लोगों का नाम नहीं जोड़ा गया है जिनकी शादी हो गई है गरीब है लगभग हर ग्राम पंचायतों में ऐसे नाम देखने को मिल जायेंगे।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी नगवां अनिल सिंह से सेल फोन पर वार्ता किया गया तो उल्टा उन्होंने ने पत्रकार से ही आवास सूची और अपात्रों के नाम मांगने लगे जबकि उनके ब्लॉक में ही सारे रिकॉर्ड मौजूद है उनके इस प्रकार के बेहूदा बयान से एक बात तो साफ है की शासन की योजनाओं को पारदर्शिता पूर्ण रूप से धरातल पर उतारने की मंशा नहीं है ऐसे ही अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते है और अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वाहन नहीं करते है।
इस मामले में जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया जाता है कि मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर पूरे ब्लॉक के पीएम आवास सूची का पुनः संशोधन करने हेतु संबंधित को निर्देशित करें।

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