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मरीज चोरी और मौत मामले में सरकारी अस्पताल के जिम्मेदारों पर कब तय होगी जबाबदेही ? चर्चाओं में स्वास्थ्य विभाग

 पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र उपेन्द्र तिवारी संवाददाता 





दुद्धी, सोनभद्र। सड़क हादसे में घायल शिक्षा विभाग के संविदा कर्मी को इलाज के लिए दुद्धी सीएचसी में भर्ती कराया गया था। सरकारी डॉक्टरों की मौजूदगी के बीच  रात के अंधेरे में निजी अस्पतालों के दलाल वार्ड में घुसते हैं और बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीज को उठा ले जाते हैं। यह पूरी शर्मनाक वारदात अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ दर्ज है। सवाल यह उठता है कि जब मरीज को डिस्चार्ज ही नहीं किया गया, तो वह बिना डॉक्टरों  की अनुमति के वार्ड से बाहर कैसे चला गया ? क्या इतनी बड़ी लापरवाही के लिए सरकारी अस्पताल के जिम्मेदारों पर जबाबदेही तय नही होनी चाहिए ? यह सवाल अब चर्चाओं का विषय बन गया हैं। आखिर ज़ब सरकारी अस्पताल से मरीज चोरी और मौत के लिए जिम्मेदार कौन हैं  ? 

सूत्रों की माने तो सीएचसी अधीक्षक ने अपनी और अपने स्टाफ की गर्दन बचाने और सरकारी अस्पताल से मरीज चोरी की मामले से ध्यान भटकाने में जुटे हुए हैं और अब निजी अस्पतालों पर बम फोड़ने में जुटे हुए।जनता का साफ कहना है कि यह छापेमारी और एफआईआर केवल स्वास्थ्य विभाग की आंतरिक मिलीभगत को छुपाने और जनता के आक्रोश को शांत करने का एक हथकंडा है। बिना सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के कमीशन और सांठगांठ के कोई भी दलाल सरकारी वार्ड से मरीज चोरी करने की हिम्मत नहीं कर सकता। 


जनता की मांग: सीएचसी अधीक्षक पर दर्ज हो मुकदमा, निष्पक्ष जांच हो -


पीड़ित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी(DM )चर्चित गौड़ और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)रमेश कुमार मिश्रा से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। जब तक सरकारी परिसर के भीतर दलालों को संरक्षण देने वाले सीएचसी अधीक्षक और संबंधित स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित नहीं किया जाता, तब तक दुद्धी क्षेत्र की गरीब जनता को न्याय मिलना असंभव है।

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