पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय/सत्यनारायण मौर्य ब्यूरो चीफ सोनभद्र
*एडीओ पंचायत बोले - जब तक सरकार और अधिकारी चाहेंगे तब तक ब्लॉक में बने रहेंगे*
*सोनभद्र / वैनी।* विकास खंड नगवां में स्वच्छ भारत मिशन कागजों तक सिमट कर रह गया है। आरोप है कि पंचायती राज विभाग के अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर चहेते सफाई कर्मियों को संरक्षण दे रहे हैं, वहीं एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के कर्मियों से भेदभाव किया जा रहा है।
*नियमों को ताक पर रखकर तैनाती*
शासनादेश के अनुसार किसी भी सफाई कर्मी की तैनाती उसके गृह ग्राम पंचायत या ब्लॉक में नहीं हो सकती। लेकिन नगवां में पिछले 10 वर्षों से कई कर्मी अपने ही गांव और ब्लॉक में जमे हुए हैं। गांवों में नालियां बजबजा रही हैं, गंदगी का अंबार है, लेकिन सफाई कर्मी गांव में आते ही नहीं।
*सीएम पोर्टल की शिकायत भी बेअसर*
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई थी। एडीओ पंचायत नगवां कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आख्या में लिखा कि ट्रांसफर उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और पत्रावली जिला पंचायत राज अधिकारी को अग्रेषित कर दी गई है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
*पूछने पर एडीओ पंचायत का अजीबोगरीब बयान*
जब एडीओ पंचायत नगवां कौशलेंद्र विक्रम सिंह से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि "जब तक सरकार और अधिकारी चाहेंगे तब तक ब्लॉक में बने रहेंगे।"
ग्रामीणों का आरोप है कि जो सफाई कर्मी अपने ही गांव में नियुक्त हैं, उनकी सामूहिक ड्यूटी भी एडीओ पंचायत द्वारा जानबूझकर नहीं लगाई जाती, ताकि उन्हें काम न करना पड़े।
*ड्यूटी में जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप*
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप जातिगत भेदभाव का है। नाम न छापने की शर्त पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के कई सफाई कर्मियों ने बताया कि ब्लॉक के अधिकारियों द्वारा सामूहिक ड्यूटी और वीआईपी ड्यूटी लगाने में जाति देखकर भेदभाव किया जाता है।
आरोप है कि एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के कर्मियों से ज्यादा काम कराया जाता है, उन्हें दूर-दराज के गांवों और कठिन स्थानों पर भेजा जाता है, जबकि सामान्य वर्ग के संरक्षण प्राप्त चहेते कर्मियों को ड्यूटी से छूट दी जाती है या आसान जगहों पर लगाया जाता है। इससे कर्मियों में गहरी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
*गांव में न जाने वाले सफाई कर्मी*
1. पीयूष सिंह - सोहदाग के मझुई
2. विनय सिंह - महुली के खोड़ैला
3. शिव प्रसाद - चरगड़ा
4. सुधीर रंजन - काजियारी के तेनुआही
5. राजेश कुमार पांडेय - बेउआ के पानिकब खुर्द
6. अयूब अहमद - दरेव के बरवारी
*अपने ही गांव में जमे कर्मी*
1. रमेश सिंह - आमडीह
2. फूलचंद - बैनी
3. विजय प्रताप मिश्रा - नंदना के नरऊंज
*अधिकारियों के यहां चाकरी*
सूत्रों का आरोप है कि कई सफाई कर्मियों से अधिकारियों के आवास पर झाड़ू-पोंछा, खाना बनाने, कुत्ता टहलाने और गाड़ी चलाने जैसे निजी कार्य कराए जा रहे हैं। गाजीपुर, बलिया के कुछ कर्मी सिर्फ वेतन पर हस्ताक्षर करने आते हैं और फिक्स रकम देकर चले जाते हैं।
इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण से पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
ग्रामीणों और पीड़ित सफाई कर्मियों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और ड्यूटी में जातिगत भेदभाव खत्म करने की मांग की है।


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