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अज्ञानता की जंजीरों से स्वतंत्र होने का पर्व है श्री कृष्ण जन्माष्टमी: बीके सुमन

 श्री कृष्ण-राधा के भेष में बच्चों ने मोहा मन

पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र राजेश कुमार पाठक 





- श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विकास नगर स्थित ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पर हुआ आयोजन






सोनभद्र। मानवीय चेतना के महानायक श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का यादगार पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी संपूर्ण मानवता के लिए आध्यात्मिक जागरण का पर्व है।श्री कृष्ण का जन्म केवल एक तिथि मात्र का स्मरण नहीं है। यह आंतरिक पांच महाविकारों और अज्ञानता की जंजीरों से स्वतंत्र होने का पर्व है। 

परमात्मा का अवतरण ही उस समय होता है जब अधिक अधर्म फैला हुआ होता है। इसी प्रकार मनुष्य का जीवन जब सबसे अधिक भय,अहंकार, सत्ता और समाज के डर से घिरा होता है तो जीवन में दिव्य चेतना के जन्म लेने की संभावना  विद्यमान होती है। इसलिए जीवन की सभी परिस्थितियों में श्रीकृष्ण के समान समभाव होकर चलते रहना चाहिए। यही जन्माष्टमी का अध्यात्मिक संदेश है। उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के विकास नगर स्थित स्थानीय सेवाकेंद्र की मुख्य संचालीका बीके सुमन दीदी ने जनपद के विभिन्न भागों से आए हुए श्रद्धालुओं से कहा। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवन और समाज की परिस्थितियां हमारे लिए हमारी सकरात्मक मनोवृति के कारण प्रेरणा का माध्यम बन जाती है। ईश्वरीय ज्ञान और राजयोंग के अभ्यास से जीवन में सकारात्मक मनोवृति का निर्माण होता है। 

बी के दीपशिखा बहन नें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आध्यात्मिक रहस्य बताई। सभी का स्वागत नृत्य कु साक्षी व  कु प्रियंसी नें किया। अनेक मनमोहक नृत्य नाटक  नायरा, रिया, मोना, ज्योति, निक्की, कविता,जिया, आरती, ओम, देव, दीप, बैभव, हर्षित, पूनम,नबच्चों के द्वारा इतना आकर्षक नृत्य नाटिका देखकर सभी का मन प्रफूल्लीत हो गया । लक्ष्मी के रूप मे -रिद्धि,नारायण- के भेष मे प्रीति ने अपना रूप धारण किया था।इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे बीके सीता, बीके सरोज, बीके कविता, बीके दीपशिखा, डॉ अनुपमा सिंह,बीके हरीन्द्र भाई,डॉ  संजय सिंह, अवधेश भाई, राजीव भाई,बृजकिशोर भाई, रामप्रवेश भाई आदि का विशेष योगदान रहा।

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