पूर्वांचल कि आवाज न्यूज चंदौली संपादक विजय शंकर पाण्डेय
प्रभु श्रीराम और माता सीता की झांकी का पूजन कर निभाई कन्यादान की रस्म
नौगढ़। दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गये।
कथावाचिका राघव प्रिया ओझा ने प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। इस दौरान विवाह की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई।
झांकी में सजे प्रभु श्रीराम और माता सीता का पांव पूजन कर मुख्य यजमान सुनीति रामायणी और शिवनारायण जायसवाल ने विधि-विधान से कन्यादान की रस्म निभाया।
मंगल गीतों और जय श्रीराम के जयकारों से कथा परिसर गूंज उठा।
कथावाचिका राघव प्रिया ओझा ने श्रीराम-जानकी विवाह प्रसंग के माध्यम से जनमानस को प्रेम, त्याग, समर्पण और पारिवारिक मर्यादाओं का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श है। उनके चरित्र से हमें माता-पिता का सम्मान करने, अपने कर्तव्यों का पालन करने और रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
माता सीता का जीवन धैर्य, साहस और समर्पण का प्रतीक है। वर्तमान समय में परिवारों में संस्कारों और आपसी विश्वास को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
बताया कि बच्चों को केवल शिक्षित करना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देना भी जरूरी है।
जिससे वे जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझ सकें।
श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा सहयोग की भावना को बढ़ावा दें।
धार्मिक कथाओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देना और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है।
श्रीराम-जानकी विवाह की झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम और माता सीता के दर्शन कर जीवन सुख-समृद्धि की कामना किया।
विवाह प्रसंग के भावपूर्ण वर्णन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा सुनने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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