पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
राजदरी-देवदरी में पर्यावरण संरक्षण पर कार्यक्रम
वन्यजीवों की सुरक्षा और इको पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर
नौगढ़। जंगलों की कटाई से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है।
जिससे उनका गांवों और बस्तियों की ओर पलायन की आशंका बढ़ जाती है।
पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़-पौधों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
यह बातें सोमवार को राजदरी-देवदरी इको पर्यटन स्थल स्थित सभागार में आयोजित पारिस्थितिकीय पर्यावरण संरक्षण जन-जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी अखिलेश कुमार दुबे ने कहा।
बताया कि पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। रेंजर ने वन, वन्यजीव और जैव विविधता की सुरक्षा के महत्व को समझा कर कहा कि स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इको पर्यटन को बढ़ावा देना, पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना तथा प्रकृति एवं वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी कार्यक्रम का उद्देश्य है।
जनसहयोग से जंगलों और पेड़-पौधों को बचाने की अपील कर के बताया कि शाकाहारी जीव जंगलों की घास और वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं।
वहीं मांसाहारी जीव छोटे वन्यजीवों का शिकार करते हैं। प्रकृति में सभी जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जंगलों को सुरक्षित रहने पर ही वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी संरक्षित रहेगा।
बताया कि गैर जनपदों से लाकर क्षेत्र के जंगलों में चार नर और तीन मादा तेंदुओं को छोड़ा गया है।
वाराणसी से आए पर्यटक प्रद्युम्न यादव ने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण के साथ ही पहले से मौजूद पेड़ों को बचाना भी जरूरी है। प्रकृति की गोद में ही सुकून और शांति मिलती है।
वन दरोगा ऋषु चौबे ने भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व की जानकारी देकर के सनातन धर्म में वृक्षों की पूजा की परंपरा और जीवन में लकड़ी की उपयोगिता के बारे में बताया।
छात्र विशेष कुमार ने कहा कि पेड़-पौधे हमें निशुल्क ऑक्सीजन देते हैं।
लोगों से पेड़ों की कटाई रोकने और हरियाली बनाए रखने की अपील किया।
कार्यक्रम में उपनिरीक्षक जयप्रकाश यादव हेड कांस्टेबल शिवजी सिंह प्राथमिक विद्यालय जमसोती के बच्चे वनकर्मी, शिक्षकगण और स्थानीय लोग मौजूद रहे।


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