गरीबी, बेरोजगारी और जल-जंगल-जमीन के सवाल पर सरकार घिरी
पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर बोले — “जातीय विभाजन नहीं, युवाओं को रोजगार और अधिकार चाहिए”
देश में विकास और “विकसित भारत” के बड़े-बड़े दावों के बीच अब बेरोजगारी, गरीबी, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक विभाजन जैसे मुद्दे फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के पास गरीबी और बेरोजगारी खत्म करने की कोई ठोस नीति नहीं है। सरकार केवल जातीय विभाजन और भावनात्मक मुद्दों के सहारे राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब तक देश में मजबूत युवा नीति, रोजगार नीति और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक भारत को समृद्ध और विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। आजादी के 78 साल बाद भी देश का गरीब और बेरोजगार युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, जो सरकारों की नीतिगत विफलता को दर्शाता है।
*हसदेव जंगल कटाई पर संतोष ठाकुर का बड़ा हमला*
*“आदिवासियों को उजाड़कर नहीं हो सकता विकास”*
युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में जंगल कटाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर हजारों आदिवासियों को उनकी जमीन और जंगल से बेघर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विकास का मॉडल गरीबों, किसानों और आदिवासियों को विस्थापित करने वाला होगा, तो देश में सामाजिक असंतोष और बढ़ेगा। सरकार को कॉरपोरेट हितों से ऊपर उठकर जनता के हित में नीतियां बनानी चाहिए।
*“जातीय राजनीति छोड़ो, युवाओं के भविष्य की बात करो”*
*संतोष ठाकुर ने सरकार पर समाज को बांटने का लगाया आरोप*
संतोष ठाकुर ने कहा कि सरकार जातीय और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देकर जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है। जबकि देश का युवा रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी आज देश के सबसे बड़े मुद्दे हैं, लेकिन सरकार के पास इनके समाधान के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखाई देता। देश की राजनीति का केंद्र युवाओं को अवसर देना होना चाहिए, न कि समाज को बांटना।
*“अंग्रेज गए, लेकिन अंग्रेजी कानून अब भी कायम”*
*राष्ट्रभाषा और स्वदेशी व्यवस्था लागू करने की मांग*
सभा को संबोधित करते हुए संतोष ठाकुर ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी देश में अंग्रेजों के समय के कई कानून लागू हैं। उन्होंने कहा कि 1919 से चली आ रही औपनिवेशिक सोच आज भी प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था में दिखाई देती है।
उन्होंने राष्ट्रभाषा को मजबूत करने, भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता देने और पूरी व्यवस्था को भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना के अनुरूप ढालने की मांग की।
*क्षेत्रीय विकास और रोजगार के लिए अलग राज्य की मांग तेज*
युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने कहा कि पूर्वांचल–सोनांचल क्षेत्र वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां के युवा बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय असंतुलन खत्म करने और स्थानीय लोगों को अधिकार दिलाने के लिए *पूर्वांचल–सोनांचल राज्य का गठन एक मजबूत विकल्प हो सकता है।*
उन्होंने कहा कि जब तक गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं के हित में नीतियां नहीं बनेंगी, तब तक देश का वास्तविक विकास संभव नहीं है।

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