पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
*बिना सत्यापन के ही हो रहा भुगतान
नगवां ब्लॉक में अधिकारियों और प्रधान के सांठ गांठ से सरकारी धन के लूट का चल रहा खेल
बैनी सोनभद्र। विकास खंड नगवां में सार्वजनिक शौचालय के नाम की लूट , यही कहानी चल रही है नगवां ब्लॉक के ग्राम पंचायतों में एक तरफ अधिकारी जांच में ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय बंद पाया जाता है जिसकी रिपोर्ट अधिकारी ने सत्यापन में लगाया है और जांच जून माह में की गई थी बावजूद इसके ग्राम प्रधान ने मार्च से लेकर अगस्त माह तक का केयरटेकर का मानदेय 36000 रुपए निकाल लिया है जबकि कागजी कार्रवाई में शौचालय बंद होने की बात कही गई थी ग्राम पंचायत में पंचायत निधि से धन का भुगतान की प्रक्रिया में काफी गोलमाल किया जा रहा है अधिकारियों की कोई जवाब दे ही या उनके कार्य शैली में गुणवत्ता और पारदर्शिता का साफ अभाव देखा जा सकता है मामला कइ ग्राम पंचायतों का बताया जा रहा है। जबकि शासनादेश में कहां गया था अभी सभी बंद पड़े सामुदायिक शौचालयों
को क्रियाशील करते हुए ही केयरटेकरों का मानदेय दिया जाए फिर बिना क्रियाशील के ही ग्राम पंचायत आदि गावों में केयरटेकर का भुगतान लगातार किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार नगवां ब्लॉक के कइ ग्राम पंचायतों सहीत जिस भी ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय विभागीय जांच में आवश्यक सुविधाओं जैसे समरसेबल पानी आदि के अभाव में बंद होने की रिपोर्ट लगाई गई है अब सवाल यह उठता है कि जब जांच अधिकारी द्वारा जून माह में शौचालय बंद होने की बात कही गई है फिर केयरटेकर का मार्च माह से लेकर अगस्त माह तक 36000 रुपए का भुगतान क्यों जबकि कोई भी ग्रामीण सामुदायिक शौचालय का लाभ नहीं ले रहा है तो फिर केयरटेकर का मानदेय क्यों दिया गया इस प्रकार से ग्राम पंचायतों में कई ऐसे से कार्य हुआ होगा जिसका कोई आवश्यकता ही नहीं थी इस प्रकार की कार्य शैली अधिकारियों की रही है भुगतान प्रक्रिया में अगर इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो सारा मामला परत दर परत खुलने की संभावना है। जबकि ब्लॉक मुख्यालय पर ग्राम पंचायतों की निगरानी करने के लिए पंचायत कार्यालय में एडीओ पंचायत की नियुक्ति होती है पर ग्राम पंचायतों के प्रति उनकी भी काफी उदासीता देखने को मिलती हैं
जिन भी गांव में शौचालय बने हैं उस गांव के समस्त ग्रामीणों का कहना है कि जब सामुदायिक शौचालय का लाभ ग्रामीण नहीं ले पा रहे हैं तो फिर उसके साफ सफाई केयरटेकर का मानदेय आदि का भुगतान क्यों किया जा रहा है जबकि जांच रिपोर्ट में शौचालय बंद होने की रिपोर्ट लगाई गई है। ये कहानी किसी एक गांव की नहीं बल्कि पूरे ब्लॉक में 90 फ़ीसदी सामुदायिक शौचालय बंद पड़े मिलेंगे बहुत जगहों पर तो समरसेबल सहित टंकी ही गायक फिर भी शौचायलयों के रखरखाव साफ सफाई और केयरटेकर के नाम पर लगातार भुगतान किया जा रहे हैं जबकि जो शौचालय क्रियाशील नहीं है यह ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है कि वह शौचायलयों का सही ढंग से क्रियाशील करें और केयरटेकरों का भुगतान हो।
इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण, से सेल फोन पर वार्ता करने का प्रयास किया गया तो हमेशा की तरह आज भी उनका फोन नहीं उठा, एडीओ पंचायत नगवां का भी फोन नहीं लगा इस लिए इन लोगों का पक्ष नही जाना जा सका ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जांचकर कार्यवाही की मांग की है।



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