पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
13 दिसंबर 2005 से वन क्षेत्रों में रह रहे SC/ST/OBC परिवारों को अधिकार देने का प्रस्ताव
नौगढ़ चन्दौली
वन अधिकार अधिनियम-2006 के अन्तर्गत वन क्षेत्रों में लंबे समय से रह रहे परिवारों को अधिकार दिलाने की मांग को लेकर सांसद छोटेलाल खरवार के प्रस्ताव पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिया हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सांसद को भेजे पत्र में वन अधिकार अधिनियम में संशोधन कर 13 दिसंबर 2005 से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों को भी इसके दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव का उल्लेख किया है।
केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम की ओर से 21 अगस्त 2026 को सांसद छोटेलाल सिंह खरवार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उन्हें वन अधिकार अधिनियम-2006 में संशोधन करते हुए 13 दिसंबर 2005 से एससी/एसटी/ओबीसी जातियों के परिवारों को वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा, आवास, लाल कार्ड, आयुष्मान कार्ड तथा अलग से शिक्षा की व्यवस्था किए जाने के संबंध में सांसद का पत्र प्राप्त हुआ है।
मंत्री ने पत्र में कहा है कि सांसद के प्रस्ताव पर आवश्यक कार्यवाही के लिए मंत्रालय के संबंधित विभाग को निर्देश दिया गए हैं। इससे वन क्षेत्रों में वर्षों से निवास कर रहे ऐसे परिवारों में अपने अधिकारों को लेकर उम्मीद जगी है।
वन अधिकार अधिनियम की धारा-4 में वन अधिकारों की मान्यता, उनके पुनर्स्थापन और निहित होने का प्रावधान है। कानून में वन अधिकारों की मान्यता और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक पात्र वनवासियों को उनकी कब्जे वाली वन भूमि से बेदखल नहीं किए जाने का भी प्रावधान है। वहीं संरक्षित क्षेत्रों में पुनर्वास की स्थिति में ग्राम सभा की भूमिका और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की शर्तें भी निर्धारित हैं।
स्थानीय स्तर पर वन भूमि पर पीढ़ियों से खेती और निवास करने वाले परिवार लंबे समय से वन अधिकार कानून के अन्तर्गत अधिकार दिए जाने की मांग उठाते रहे हैं। सांसद ने केंद्रीय स्तर पर उठाए गए इस मुद्दे और केंद्रीय मंत्री के संबंधित विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद इस मांग को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

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