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वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर भाजपा को फिर झटका, सपा का कब्जा बरकरार

 पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र उपेन्द्र कुमार तिवारी संवाददाता 








 शक्तिनगर ,सोनभद्र/ वाराणसी (जयदेश ) प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में विधान परिषद की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। समाजवादी पार्टी के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 4898 मतों के अंतर से पराजित किया।


चुनाव आयोग के अनुसार लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले जबकि डॉ. प्रमोद मिश्रा को 6060 मतों पर संतोष करना पड़ा। इस सीट पर कुल 10 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह को 3111 मत मिले। 1441 मत अवैध घोषित किए गए।


यह निर्वाचन क्षेत्र आठ जिलों - वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया में फैला है। मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था और मतगणना  27 अक्टूबर को पहड़िया मंडी में हुई।


भाजपा ने इस बार भी अनुभवी चेहरे पर दांव खेला था। पार्टी ने वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को प्रत्याशी बनाया था, जो पूर्व में एमएलसी रह चुके हैं। वहीं सपा ने अपने वर्तमान एमएलसी पर ही भरोसा जताया था।


हार के पांच कारण


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस हार के पीछे पांच प्रमुख कारण रहे।


पहला, अति आत्मविश्वास। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह स्वयं 2020 की हार के बाद कह चुके थे कि कार्यकर्ताओं के अति आत्मविश्वास से हार मिली थी। वही पैटर्न इस बार शिक्षक सीट पर भी दोहराया गया।


दूसरा, शिक्षक वर्ग के जमीनी मुद्दे। पुरानी पेंशन योजना, वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय और स्थानांतरण नीति जैसे मुद्दों पर सरकार से नाराजगी को सपा ने भुनाया, जबकि भाजपा का प्रचार संगठनात्मक रहा।


तीसरा, व्यक्तिगत संपर्क की कमी। स्नातक-शिक्षक चुनाव बूथ प्रबंधन से नहीं, व्यक्तिगत संपर्क से जीता जाता है। निवर्तमान एमएलसी लगातार शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे।


चौथा, वोटों का बिखराव। पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह ने 3111 वोट काटकर भाजपा के गणित को बिगाड़ दिया।


पांचवां, संगठनात्मक अव्यवस्था। नामांकन के दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की में भाजपा प्रत्याशी के बाहर रह जाने की घटना ने कार्यकर्ताओं में गलत संदेश दिया।


यह परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए चेतावनी है कि शिक्षक वर्ग में केवल राष्ट्रवाद नहीं, सेवा शर्तों पर स्पष्ट रोडमैप चाहिए।

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