पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय विनीत वरिष्ठ पत्रकार
*सोनभद्र।* सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही और बंधी प्रखंड के जेई की संदिग्ध भूमिका से किसान बर्बाद होने के कगार पर हैं। ताजा मामला चतरा ब्लॉक अंतर्गत *नर्सों बंधी* से जुड़ा है, जहां सिलथम के स्विच को जानबूझकर नहीं खोला जा रहा है, जिससे सैकड़ों बीघा फसल सूखने लगी है।
*एक हफ्ते से फोन नहीं उठा रहे जेई*
क्षेत्रीय किसानों का आरोप है कि विगत एक हफ्ते से वे लगातार संबंधित जेई को फोन लगाकर नहर खोलने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कुंभकरणी निद्रा में सोए हुए हैं। जेई साहब फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझ रहे। परेशान किसानों का कहना है कि जब वे फोन पर ही नहीं आ रहे तो फरियाद सुनेंगे कैसे?
*तलहटी की नहर खुली, ऊपर की बंद - खेल प्रभावशाली लोगों का?*
किसानों ने बताया कि नर्सों बंधी में सिंचाई के लिए जो स्विच लगे हैं, उनमें *सिलथम का स्विस सबसे ऊपर* है। नियमतः पहले ऊपर की नहर खोली जानी चाहिए, लेकिन जेई की मनमानी के चलते इसे बंद रखा गया है। इसके विपरीत तलहटी में पड़ने वाली *पटना, गिरिया और पड़री की नहरें चुपके से खुलवा दी गई हैं।* किसानों का आरोप है कि जेई चुपके से आकर पटना और गिरिया की नहर खोलवाकर चले गए, इसकी भनक तक सिलथम के किसानों को नहीं लगी।
किसानों का सीधा आरोप है कि जेई कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों के प्रभाव में आकर भेदभाव कर रहे हैं और सिर्फ तलहटी की नहरों को ही पानी दे रहे हैं। जबकि सिलथम के किसान सूखती फसल देख कर खून के आंसू रो रहे हैं।
*बड़े आंदोलन की चेतावनी*
सिलथम के सभी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जिलाधिकारी महोदय और बंधी प्रखंड से संबंधित उच्च अधिकारी मामले को तुरंत संज्ञान में लेकर शीघ्र-अतिशीघ्र सिलथम का स्विस नहीं खुलवाते हैं, तो फसल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति कौन करेगा - जेई या विभाग?
किसानों ने कहा कि अगर 24 घंटे मतलब 8 अक्टूबर के भीतर नहर नहीं खुली तो वे एकजुट होकर बड़े पैमाने पर *चक्का जाम* करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बंधी प्रखंड के जेई और जिले के लापरवाह आला अधिकारियों की होगी।


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