पूर्वांचल कि आवाज न्यूज लखन
ऊ।। खास रिपोर्ट
- दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई हो, जो नजीर बने
- पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग
लखनऊ। हापुड़ में पत्रकार नसीम अहमद की नृशंस हत्या की खबर से मन अत्यंत व्यथित, स्तब्ध और आक्रोशित है। यह केवल एक पत्रकार की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर किया गया गंभीर प्रहार है। समाज की आवाज बनकर जनसमस्याओं को सामने लाने वाले पत्रकार यदि अपने दायित्वों का निर्वहन करते समय ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यह समूची व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता और आत्ममंथन का विषय है।
उक्त उदगार व्यक्त करते हुए ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उ0प्र0 के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि मैं इस हृदयविदारक घटना पर दिवंगत पत्रकार नसीम अहमद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
इस कठिन घड़ी में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश पूरी संवेदना के साथ पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। परिवार ने अपना प्रियजन खोया है, जिसकी भरपाई किसी भी कीमत पर संभव नहीं है। परिजनों का दुःख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। हम उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि इस दुःख की घड़ी में पत्रकार संगठन उनके साथ है और उन्हें न्याय दिलाने की मांग पूरी दृढ़ता से उठाता रहेगा।
प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन से हमारी स्पष्ट मांग है कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों की तत्काल पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए तथा निष्पक्ष एवं त्वरित विवेचना के बाद दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा दिलाई जाए। कार्रवाई ऐसी हो, जो नजीर बने और भविष्य में किसी भी व्यक्ति को पत्रकार पर हमला करने से पहले कानून के अंजाम का एहसास हो। साथ ही, प्रदेश सरकार पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति और भविष्य को ध्यान में रखते हुए यथोचित आर्थिक सहायता प्रदान करे, ताकि इस असहनीय संकट में परिवार को संबल मिल सके।
प्रदेश अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि
आज पत्रकारों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक पत्रकार अपने समाचार संकलन और जनहित से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते हुए अनेक प्रकार के दबावों, धमकियों और हमलों का सामना करते हैं। विडंबना यह है कि समाज को सच से रूबरू कराने वाले पत्रकारों की अपनी सुरक्षा ही सवालों के घेरे में है। ऐसी घटनाएं न केवल पत्रकार समुदाय में भय पैदा करती हैं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए भी गंभीर खतरा हैं।
उन्होंने कहा कि अब केवल शोक व्यक्त करने और जांच के आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस, प्रभावी और स्थायी व्यवस्था बनाना समय की अनिवार्य मांग है। प्रदेश सरकार ऐसी नीति और कार्यप्रणाली सुनिश्चित करे, जिससे पत्रकारों को धमकी या हमले की स्थिति में तत्काल सुरक्षा मिले, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो और दोषियों को समयबद्ध तरीके से दंडित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश मांग करता है कि पत्रकार नसीम अहमद को न्याय दिलाने के साथ-साथ प्रदेश के समस्त पत्रकारों की सुरक्षा को शासन की प्राथमिकता बनाया जाए। किसी भी पत्रकार की हत्या या उस पर हमला केवल एक व्यक्ति अथवा परिवार की क्षति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनविश्वास पर चोट है।
नसीम अहमद को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके परिजनों को न्याय और सम्मानजनक सहायता मिले तथा भविष्य में किसी अन्य पत्रकार के परिवार को ऐसी असहनीय पीड़ा से न गुजरना पड़े।

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