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​दुद्धी में सड़क हादसा: स्वास्थ्य व्यवस्था के 'दलालों' पर लगा मौत का सौदा करने का आरोप, संविदा कर्मी की गई जान

 पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय /सत्यनारायण मौर्य ब्यूरो चीफ 

​- सीएचसी से बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने और तड़के मौत के बाद शव को सरकारी अस्पताल के प्रतीक्षालय में लावारिस छोड़ने का सनसनीखेज आरोप

- परिजनों ने कोतवाली और उच्चाधिकारियों को दी लिखित तहरीर, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

​दुद्धी (सोनभद्र)। दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के गुलालझरिया गांव के पास शनिवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में शिक्षा विभाग के एक संविदा कर्मी की असमय मौत हो गई, जबकि उनका साला गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दुखद घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य महकमे और सरकारी अस्पतालों में सक्रिय 'दलाल तंत्र' पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने एक निजी अस्पताल और उसके कथित दलालों पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोप है कि बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीज की जान से खिलवाड़ किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तफ्तीश में जुट गई है।



​अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतरी बाइक

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोन ब्लॉक के ग्राम निगाई (टोला बोकराखाड़ी) निवासी रामविचार गोड़ (30 वर्ष) पुत्र भोलासिंह अपनी बहन के घर बभनी क्षेत्र गए हुए थे। शनिवार की देर रात करीब 11 बजे वह अपने साले तिलक राज गोड़ (25 वर्ष) पुत्र गुलाब सिंह (निवासी हलिया, मिर्जापुर) के साथ मोटरसाइकिल से वापस घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के गुलालझरिया गांव में ग्राम प्रधान के घर के समीप पहुंची, अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि बाइक चला रहे रामविचार गोड़ को गंभीर चोटें आईं, जबकि पीछे बैठे उनके साले तिलक राज को मामूली चोटें लगीं।

​सीएचसी में 'दलालों' ने बुना जाल

​घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और एंबुलेंस की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) दुद्धी लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। परिजनों का आरोप है कि देर रात अस्पताल परिसर में कुछ संदिग्ध लोग (कथित दलाल) सक्रिय थे। रामविचार की गंभीर स्थिति का फायदा उठाते हुए उन लोगों ने परिजनों को डराया और बेहतर इलाज व बड़े डॉक्टरों का झांसा देकर उन्हें जाबर स्थित एक निजी अस्पताल ले जाने के लिए मानसिक रूप से मजबूर कर दिया। कमीशन के चक्कर में दलालों के बहकावे में आकर परिजन रात करीब डेढ़ बजे एक निजी वाहन से घायल रामविचार को उक्त निजी अस्पताल ले गए।

​तड़के हुई मौत, तो शव को सरकारी अस्पताल में छोड़ भागे आरोपी

​परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन तड़के करीब साढ़े तीन बजे उपचार के दौरान रामविचार की सांसें थम गईं। मरीज की मौत होते ही निजी अस्पताल प्रबंधन और वहां मौजूद बिचौलियों के हाथ-पांव फूल गए। कानूनी कार्रवाई और हंगामे से बचने के लिए उन्होंने एक बेहद अमानवीय कदम उठाया। आरोप है कि वे लोग आनन-फानन में मृतक के शव को वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी लेकर आए और वहां के प्रतीक्षालय (वेटिंग रूम) में चुपचाप छोड़कर रफूचक्कर हो गए।

​सुबह जब सीएचसी के चिकित्सकों ने प्रतीक्षालय में पड़े युवक की जांच की, तो उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी।

​परिजनों में भारी आक्रोश, कार्रवाई की मांग

​इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने कोतवाली दुद्धी और जिले के उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का साफ कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दलालों का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो सीधे-साधे और ग्रामीण मरीजों को गुमराह कर निजी क्लीनिकों में भेजता है। अगर रामविचार का समय पर किसी अच्छे सरकारी या रिफर सेंटर पर सही इलाज हुआ होता, तो आज उसकी जान बचाई जा सकती थी।

​पिछले वर्ष ही हुई थी शादी, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

​पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि रामविचार गोड़ दो भाइयों में बड़े थे और उनकी पांच बहनें हैं। उनकी शादी पिछले वर्ष ही मिर्जापुर जिले में हुई थी। अभी वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही हुई थी कि इस हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। हाल ही में रामविचार का चयन शिक्षा विभाग में संविदा कर्मी के पद पर हुआ था और वह मिर्जापुर में ही कार्यरत थे। नौकरी मिलने की खुशी अभी परिवार ठीक से मना भी नहीं पाया था कि इस असामयिक निधन से मां-बाप और पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद से ही गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

​पुलिस और प्रशासन का रुख

​इस पूरे मामले में पुलिस का कहना है कि शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। अस्पताल परिसर से मरीज को शिफ्ट करने और मौत के बाद शव को छोड़ने के आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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