पूर्वांचल कि आवाज न्यूज सोनभद्र विजय शंकर पाण्डेय
नौगढ़ चंदौली
नौगढ़। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद राम किशुन यादव ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी जनजातियों का संवैधानिक अधिकार है। पीढ़ियों से बसे आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन और मकानों से बेदखल करना गैरकानूनी है। वन विभाग और प्रशासन को आदिवासी परिवारों के साथ न्याय करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में भी कुछ लोग सफेदपोशों के इशारे पर आदिवासी परिवारों का उत्पीड़न कर रहे हैं।
पूर्व सांसद ने बुधवार को नौगढ़ बाजार स्थित एक निजी प्रतिष्ठान पर आयोजित वार्ता के दौरान यह बातें कहीं।
कहा कि नौगढ़ क्षेत्र में पूर्व में हुए अन्याय और उत्पीड़न के कारण नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा मिला था। भरदुआ गांव की घटना इसका उदाहरण है।
वर्तमान में भी वन विभाग और प्रशासन से आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन और मकानों से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।
राम किशुन यादव ने कहा कि पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में नौगढ़ क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के साथ नक्सली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने और लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव स्वयं नौगढ़ में आकर के क्षेत्र की समस्याओं को समझकर विकास कार्यों को प्राथमिकता दिया था।
बताया कि आदिवासी परिवार लंबे समय से जंगल और जमीन पर निर्भर रहकर जीवन यापन करते आ रहे हैं। ऐसे परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित करना सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। प्रशासन को वनाधिकार कानून के तहत पात्र परिवारों के दावों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
किसी भी परिवार को बिना वैधानिक प्रक्रिया के उसकी जमीन या मकान से हटाया नहीं जाना चाहिए। वन विभाग और प्रशासन को ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर समाधान करना चाहिए। जिसमें क्षेत्र में विश्वास का माहौल कायम होने के साथ ही आदिवासी परिवारों को न्याय मिल सके।

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