पूर्वांचल कि आवाज news, खास रिपोर्ट
*वैनी, सोनभद्र।* नगवां ब्लॉक के रायपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरई गढ़ ग्राम पंचायत के लिए बीता दिन ऐतिहासिक बन गया। एक ही पंचायत के दो युवाओं का उत्तर प्रदेश पुलिस में एक साथ चयन होने से पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। घरों में बधाइयों का तांता लगा है, तो गांव की गलियों में इस सफलता की चर्चा हो रही है।
*कौन हैं ये दो युवा?*
पहले युवा हैं *सरई गढ़ गांव निवासी आरसी यादव पुत्र छोटेलाल यादव*। आरसी के पिता श्री छोटेलाल यादव एक साधारण किसान हैं, जो खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। आरसी ने बताया कि पिता की मेहनत को देखकर ही उनमें कुछ कर गुजरने का जज्बा आया।
दूसरे युवा हैं *इसी पंचायत के सोनबरसा गांव निवासी शिव जी यादव पुत्र विजय यादव*। शिव जी के पिता श्री विजय यादव भी किसान हैं। पिता ने बताया, "मुझे अपने पुत्र पर पूरा भरोसा था कि वह अपनी कड़ी मेहनत और लगन से एक दिन अच्छा मुकाम हासिल करेगा और आज मेरा सपना पूर्ण हुआ। मेरी आंखों में खुशी के आंसू हैं।"
*संघर्ष और सफलता की कहानी*
दोनों युवाओं की कहानी लगभग एक जैसी है। सुबह 4 बजे उठकर खेतों की पगडंडियों पर दौड़ लगाना, दिन में सोरांव और रॉबर्ट्सगंज में रहकर लिखित परीक्षा की तैयारी करना और रात में 2-3 घंटे ही सोना। न कोचिंग के लिए बड़े शहर जाने के पैसे, न महंगे नोट्स, बस यूट्यूब और पुरानी किताबों के सहारे तैयारी।
आरसी यादव ने बताया कि "यूपी पुलिस की भर्ती में फिजिकल सबसे कठिन था, लेकिन गांव के ही मैदान में रोज प्रैक्टिस करता था। माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद ही मेरी ताकत बना।"
*एक पत्रकार भाई, एक सिपाही भाई - सेवा के दो रूप*
इस खबर में एक और भावुक पहलू जुड़ा है। शिव जी यादव के बड़े भाई *कन्हैया लाल यादव* ने बीएससी और आईटीआई की पढ़ाई करने के बाद नौकरी के बजाय समाजसेवा और पत्रकारिता का रास्ता चुना। आज वे गरीब, असहायों की आवाज बनकर मानव धर्म निभा रहे हैं। एक भाई कलम से समाज की सेवा कर रहा है, तो दूसरा भाई अब वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था की रक्षा करेगा। दोनों भाइयों की यह जोड़ी पूरे नगवां ब्लॉक में चर्चा का विषय बनी हुई है।
*गांव में क्या है माहौल?*
चयन की खबर फैलते ही दोनों के घरों पर ग्रामीणों का आना-जाना शुरू हो गया। सरई गढ़ के प्रधान और सोनबरसा के पूर्व प्रधान ने दोनों युवाओं को फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया। गांव के बुजुर्ग रामधनी यादव ने कहा, "हमारा गांव भले ही विकास में पीछे हो, लेकिन हमारे बच्चों के हौसले बड़े हैं। इन दोनों ने साबित कर दिया कि गांव की मिट्टी में भी प्रतिभा की कमी नहीं।"
स्थानीय युवाओं में भी इस सफलता से नया जोश है। 12वीं में पढ़ रहा अमन यादव कहता है, "अब हमें भी लग रहा है कि हम भी वर्दी पहन सकते हैं। भैया लोगों ने रास्ता दिखा दिया है।"
*पूर्वांचल की आवाज NEWS का विश्लेषण*
अक्सर देखा जाता है कि शहरों के बच्चों के पास संसाधन अधिक होते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के युवा जब चयनित होते हैं तो उनके पीछे की मेहनत दोगुनी होती है। सरई गढ़ और सोनबरसा जैसे गांवों में जहां आज भी पक्की सड़क, लाइब्रेरी और स्टेडियम जैसी सुविधाओं का अभाव है, वहां से दो युवाओं का चयन पूरे सिस्टम के लिए एक संदेश है - अगर नियत साफ हो तो मंजिल जरूर मिलती है।


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