पूर्वांचल कि आवाज न्यूज नौगढ़ बृजेश कुमार केसरी
राम-भरत मिलाप, रावण वध और श्रीराम के राज्याभिषेक का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
नौगढ़। दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के समापन दिवस पर कथावाचिका राघव प्रिया ओझा ने भगवान श्रीराम के वनवास, भरत मिलाप, माता सीता का हरण, रावण वध और पुष्पक विमान से प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान भक्ति गीत-संगीत से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। समापन पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पवर्षा करके श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम हर हर महादेव के जयकारों का उद्घोष किया।
कथावाचिका ने भरत मिलाप के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि ननिहाल से अयोध्या लौटने पर भरत को पिता महाराज दशरथ के निधन और भगवान श्रीराम के वनवास की जानकारी हुई तो वह व्याकुल हो उठे। उन्होंने माता कैकेयी के निर्णय को स्वीकार नहीं किया। भरत भगवान श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुंच कर प्रभु श्रीराम से कहा कि भैया आपके बिना अयोध्या भी श्मशान जैसी लग रही है।
इस प्रसंग के माध्यम से कथावाचिका ने भाई-भाई के प्रेम, त्याग और समर्पण का संदेश दिया।
बताया कि भाइयों के बीच प्रेम इतना गहरा होना चाहिए कि उनके बीच कोई दीवार खड़ी न हो सके।
अरण्य कांड के प्रसंग में रावण की बहन शूर्पणखा, माता सीता के हरण और भगवान श्रीराम की सुग्रीव से मित्रता की कथा सुनाई। बालि वध, हनुमान जी का लंका पहुंचना, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट और रामेश्वरम सेतु निर्माण के प्रसंगों का भी वर्णन किया। कथावाचिका ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अधर्म के प्रतीक रावण का वध कर धर्म की स्थापना किया है।
रावण बध होने पर विभीषण का लंका के राजा के रूप में राज्याभिषेक किया गया।
भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे।
प्रभु के आगमन की सूचना पाकर अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। भरत सहित पूरी अयोध्या ने उनका भव्य स्वागत किया। भगवान श्रीराम के अयोध्या पहुंचने पर दीप जलाकर खुशियां मनाकर के उनका राज्याभिषेक हुआ।
इस प्रसंग के माध्यम से कथावाचिका ने संदेश दिया कि सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है।
कथा के समापन पर पंडाल में दीप प्रज्ज्वलित कर के पुष्पवर्षा की गई। भक्ति गीत-संगीत के बीच श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। नौ दिवसीय श्रीराम कथा ने लोगों को मर्यादा, भाईचारे, त्याग, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दिया।
वहीं अनेकों लोगों ने मंच पर कथावाचिका व संगीत टीम को अंगवस्त्र प्रदान कर के विदाई किया।
इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु जनप्रतिनिधि व दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।


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