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राम कथा के पांचवें दिन कथावाचिका ने राम जन्म प्रसंग का किया वर्णन
नौगढ। कस्बा नौगढ़ स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचिका राघव प्रिया ओझा ने श्रीराम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने सोहर गीत गाकर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया।
जिससे कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा।
इस दौरान श्रद्धालु भक्ति और आनंद में सराबोर हो गये।
कथावाचिका ने कहा कि सनातन धर्म में अतिथि को देवता के समान माना गया है। अतिथि देवो भव की परंपरा हमारी संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न अंग है। माता-पिता साक्षात भगवान के समान हैं।
उनका सम्मान और सेवा करना प्रत्येक संतान का परम कर्तव्य है। मां स्कंदमाता की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मां प्रेम का सागर होती हैं। उनका स्नेह और आशीर्वाद जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
बताया कि हिंदी शब्दावली के प्रत्येक शब्द का विलोम होता है। लेकिन आनंद एक ऐसा शब्द है जिसका कोई विलोम नहीं है। संसार में एक दिन सब कुछ विलीन हो जाना है। केवल भगवान श्रीराम का नाम ही शाश्वत सत्य है।
इसलिए मनुष्य को सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय प्रभु का स्मरण करना चाहिए।
श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि गुरु वशिष्ठ ने भगवान राम का नामकरण संस्कार किया था। भगवान के नाम का स्मरण मनुष्य के विचारों और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। राम नाम का जप करने से कुमति भी सुमति में बदल जाती है।
महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि उल्टा नाम जपते-जपते वे ब्रह्म के समान हो गए।
कथावाचिका ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए द्रौपदी चीरहरण प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि जब द्रौपदी की लाज बचाने में पांचों पति असमर्थ हो गए।
तब भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करने पर उन्होंने उसकी लाज बचाई।
जिससे स्पष्ट होता है कि विपत्ति में सच्चे मन से प्रभु को पुकारने पर निश्चित सहारा मिलता है।
गोमाता की महिमा बताते हुए भारतीय संस्कृति में गाय के धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
इस मौके पर मुख्य यजमान सुनीति रामायणी शिवनारायण जायसवाल अध्यक्ष पंकज जायसवाल पूर्व जिला पंचायत सदस्य साधोशरण जायसवाल, रामलाल केशरी जयशंकर सेठ राजू पांडेय पिंटू केशरी सुनील शर्मा सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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