पूर्वांचल कि आवाज न्यूज मिर्जापुर विजय शंकर पाण्डेय
संपादक
**सीएमओ की यह करतूत निंदनीय**
मिर्जापुर** शारदीय नवरात्रि 2026 विंध्य महोत्सव के पवित्र मंच पर मर्यादा का जो तमाशा देखने को मिला, वह सिर्फ शर्मनाक नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था पर सीधा कुठाराघात है। सूचना विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप “Balmukund Suchna Karyalaya” से 20 अक्टूबर शाम 6:12 बजे पत्रकारों को भेजी गई सात तस्वीरों में साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि मुख्य चिकित्साधिकारी कीर्ति कुमार मिश्र सफेद जूते पहने मंच पर सम्मान ग्रहण करते नजर आ रहे हैं, जबकि उनके बगल में खड़ी महिला अधिकारी, उद्घोषक, कलाकार और अन्य सभी नंगे पैर खड़े हैं।
माँ विंध्यवासिनी की तस्वीर वाले उस मंच पर, जहाँ रोज़ दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से कार्यक्रम शुरू होता है, जहाँ परंपरा के अनुसार जूता-चप्पल उतारकर ही जाना जाता है, वहाँ सीएमओ का जूते पहने खड़ा होना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि विंध्याचल की पवित्र परंपरा का खुला मजाक है।
फोटो और आधिकारिक खबरों के अनुसार जिन्होंने मर्यादा का पालन किया और नंगे पैर मंच पर चढ़े, उनमें शामिल हैं:
जिला पंचायत अध्यक्ष राजू कनौजिया, उप जिला मजिस्ट्रेट/पर्यटन प्रभारी जूही प्रसाद, कलाकार सूरज कुमार, मानसी रघुवंशी, हृदय मिश्र, सत्यांशु पटेल, सुजीत तिवारी, श्रीमती शिप्रा, मनीष शर्मा, रागिनी चन्द्रा, प्रतिमा मिश्रा, शेषमणि, मोहन मिश्र, कीर्ति साहनी, सतीश कुमार, मंच संचालक राजेन्द्र तिवारी (उर्फ लल्लू/ललित तिवारी) व संजय श्रीवास्तव, विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद के रूपेश श्रीवास्तव व अंजू मौर्या, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक, नगर मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार तथा कलाकार उर्मिला श्रीवास्तव, श्वेता, शैला श्रीवास्तव, मालविका हरिओम और रंजना राय।
इन सभी के पैर नंगे हैं। अकेले मुख्य चिकित्साधिकारी कीर्ति कुमार मिश्र सफेद जूतों में मंच पर “सम्मान” लेते दिख रहे हैं। यह दृश्य इतना शर्मनाक है कि देखकर लगता है मानो पवित्र मंच को किसी साधारण सरकारी बैठक का मंच समझ लिया गया हो।
देश-विदेश से दूर-दराज से आए श्रद्धालु इस दृश्य से गहरे आहत हैं। जनपद मिर्जापुर के स्थानीय भक्तों सहित बाहर से आए श्रद्धालुओं में भारी असंतोष है। लोग कह रहे हैं कि धार्मिक आस्था को इस तरह ठेस पहुँचाने वाली हरकत बर्दाश्त के बाहर है। कई श्रद्धालुओं ने सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
सूचना विभाग की भूमिका भी कम शर्मनाक नहीं। विभाग का काम था फोटो जाँच-परख कर भेजना। एक व्यक्ति जूते में और बाकी सब नंगे पैर—यह साफ दिखते हुए भी वही तस्वीरें पत्रकार समूह में डाल दी गईं। क्रॉप करके या रोककर सुधारा जा सकता था, लेकिन विभाग ने चूक का प्रचार ही कर दिया।
यह खबर किसी व्यक्ति के प्रचार या अपमान के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की चेतावनी के लिए है। विंध्य जैसे पवित्र मंच के लिए प्रशासन को तुरंत स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए कि मंच पर प्रवेश केवल नंगे पैर ही होगा। जो अधिकारी धार्मिक मर्यादा का इतना खुला उल्लंघन कर सके, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सीएमओ की यह करतूत निंदनीय है, शर्मनाक है और विंध्याचल की आस्था का अपमान है। ऐसे कृत्यों पर कठोर कार्रवाई ही भविष्य में मर्यादा की रक्षा कर सकती है।

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