*10 महीने से 4th सेमेस्टर रिजल्ट गायब, 5th-6th सेमेस्टर परीक्षा तक नहीं—छात्रों में भारी आक्रोश*
लखनऊ/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (UPBTE/BTEUP) की गंभीर लापरवाही अब हजारों वर्किंग प्रोफेशनल छात्रों के भविष्य पर सीधा प्रहार करती नजर आ रही है। बोर्ड की सुस्त और गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों में जबरदस्त आक्रोश है। आरोप है कि जुलाई–अगस्त 2025 में सम्पन्न 4th सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम आज तक घोषित नहीं किया गया, जबकि परीक्षा समाप्त हुए लगभग 10 महीने बीत चुके हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शैक्षणिक सत्र को वर्ष 2026 तक पूरी तरह समाप्त हो जाना चाहिए था, उस सत्र में अब तक 5वें और 6वें सेमेस्टर की परीक्षाएं तक आयोजित नहीं कराई गईं। यह देरी केवल शैक्षणिक अव्यवस्था नहीं, बल्कि हजारों मेहनतकश छात्रों के सपनों के साथ खुला खिलवाड़ है।
ये छात्र केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निजी कंपनियों, राज्य एवं केंद्र सरकार के विभागों में कार्यरत कर्मचारी हैं, जो नौकरी के साथ अपनी तकनीकी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। बोर्ड की इस लापरवाही का सीधा असर उनकी पदोन्नति, वेतनवृद्धि, उच्च शिक्षा, तकनीकी योग्यता सत्यापन और कैरियर ग्रोथ पर पड़ रहा है।
पीड़ित छात्रों का कहना है कि वे लगातार बोर्ड के अधिकारियों, सचिव और अध्यक्ष स्तर तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन, टालमटोल और चुप्पी ही मिली। कोई भी अधिकारी स्पष्ट रूप से यह बताने को तैयार नहीं कि रिजल्ट कब आएगा और लंबित परीक्षाएं कब होंगी।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। विभागीय स्तर पर यह कहकर मामला टाल दिया जा रहा है कि यह पूरी तरह UPBTE का विषय है। सवाल यह उठता है कि जब हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, तब आखिर जवाबदेही किसकी है?
छात्रों का आरोप है कि बोर्ड प्रशासन की उदासीनता और प्रशासनिक अराजकता ने पूरे शैक्षणिक सत्र को बर्बाद कर दिया है। आज हालात ऐसे हैं कि अनेक कर्मचारियों की विभागीय प्रक्रियाएं अटक गई हैं और उनका कैरियर अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया गया है।
*छात्रों की प्रमुख मांगें:*
- जुलाई–अगस्त 2025 में सम्पन्न 4th सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम तत्काल घोषित किया जाए।
- 5th एवं 6th सेमेस्टर परीक्षाओं की तिथि शीघ्र घोषित कर परीक्षाएं कराई जाएं।
- शैक्षणिक सत्र नियमित करने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की जाए।
- देरी और प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक आंदोलन, जनप्रतिनिधियों से शिकायत, व्यापक मीडिया अभियान और न्यायिक कार्रवाई जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या UPBTE हजारों छात्रों के भविष्य से खेलता रहेगा?
या फिर बोर्ड प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तत्काल समाधान देगा?

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